शिक्षक दिवस

आज शिक्षक दिवस है। हालांकि उम्र के इस पड़ाव पर मैं किसी भी दिवस को विशेष नहीं मानता (जन्मदिवस को भी नहीं) क्योंकि मेरे लिए हर दिवस विशिष्ट होता है। हर दिन कुछ न कुछ नया सिखाता है। आजकल फ़ेसबुक से भी मोहभंग ही है फिर भी यह पोस्ट लिख रहा हूँ ताकि "तथाकथित दलित, … Continue reading शिक्षक दिवस

सवर्ण आरक्षण: प्रतिभा हनन का एक और कुत्सित प्रयास

मूलतः मैं किसी भी प्रकार के आरक्षण के विरोध में हूँ लेकिन मंडल आयोग के दौरान हुए आत्मदाह और राजनीति के बाद मैंने अपना विरोधी तेवर थोड़ा लचीला किया और इस बात को समर्थन दिया कि: १. या तो १००% आरक्षण को सभी जातियों में उनके प्रतिशत के आधार पर बांट दिया जाए। २. बिना … Continue reading सवर्ण आरक्षण: प्रतिभा हनन का एक और कुत्सित प्रयास

“उठ जाग मुसाफिर भोर भई”

मेरी आगामी प्रेरक पुस्तक  ​"उठ जाग मुसाफिर भोर भई" के प्रकाशन की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। फ्री कॉपी (पीडीऍफ़) प्राप्त करने के लिए: https://mailchi.mp/d648ef594ca3/just-reply-few-questions-about-yourself-and-win

विश्वास

"मन के हारे हार है, मन के जीते जीत" मेरे एक मित्र ने एक अपने साथ घटी एक अनहोनी घटना सुनाते हुए बताया कि वह काफी समय से एक अंगूठी पहनता था। एक दिन अचानक वो कहीं खो गयी। उस समय वह मित्र एक ऑफिसियल टूर पर था। होटल के उस कमरे से लेकर जहाँ जहाँ … Continue reading विश्वास

आगामी उपन्यास की झलकियां – ५

अग्रवाल साहब भौतिक शास्त्र के विभागाध्यक्ष थे। कॉलेज में विभागाध्यक्ष की चवन्नी भी रूपये में चलती है। प्रयोगात्मक परीक्षा में फुल मार्क्स लेने हों तो उनसे ट्यूशन पढ़िए। इंटरनल या एक्सटर्नल एग्जामिनर जो भी हो, वो सेट कर लेंगे। कड़कड़ाती ठंड और कुहरे में सुबह के साढ़े चार बजे 18-20 लड़कों का झुण्ड अग्रवाल साहब … Continue reading आगामी उपन्यास की झलकियां – ५

आगामी उपन्यास की झलकियां – ४

"अरे! अभी तक जितेश नहीं आया क्या?" खान चचा ने अपने कमरे में घुसते ही पूछा। "नहीं, चचाजान! अभी तक तो नहीं दिखाई दिया।" कई लोग एक साथ बोले। "ठीक है। तुम लोग सारे इंतजामात दुरुस्त करो। मैं उसको लेकर आता हूँ।" कहकर खान चचा वापिस मुड़ गए। खान चचा मूलतः पाकिस्तानी थे और दुबई … Continue reading आगामी उपन्यास की झलकियां – ४

आगामी उपन्यास की झलकियां – ३

अचानक उसके सामने एक टैक्सी आकर रुकी। ड्राइवर ने दूसरी साइड की खिड़की से बाहर झांकते हुए कहा,"ये बार काफी दिन से बन्द है,साहब! आइये आपको किसी मस्त जगह ले चलता हूँ।" "अरे नहीं यार! मुझे कहीं नहीं जाना। मैं तो यूं ही खड़ा था। ..... वैसे ये बार क्यों बन्द है?" "लगभग महीने भर … Continue reading आगामी उपन्यास की झलकियां – ३